मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने करूर दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों के परिवारों को कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से सहायता दी जा सकती है, लेकिन सीधे सरकारी नौकरी देना स्वीकार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति शक्तिवेल की खंडपीठ ने कहा कि कोई भी सरकारी पद सामान्य नहीं होता, क्योंकि यह एक परिवार की आजीविका का आधार बनता है। अदालत ने यह फैसला नाम तमिलर काची (NTK) और मनिथानेय जननायक काची (MJK) के पदाधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
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