केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध के निर्माण के लिए तमिलनाडु सहित निचले राज्यों की सहमति लेना आवश्यक नहीं है। राज्यसभा में डॉ. अंबुमणि रामदास के एक सवाल का जवाब देते हुए जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने यह जानकारी दी।
मंत्री ने बताया कि 16 फरवरी 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कावेरी नदी पर निर्माण कार्य के लिए अन्य राज्यों की अनुमति अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर पानी का उपयोग करने और उसके लाभ प्राप्त करने का अधिकार है, बशर्ते यह ट्रिब्यूनल के आदेशों का उल्लंघन न करता हो।
केंद्र ने यह भी बताया कि कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तुत मेकेदातु बांध और पेयजल परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को वापस भेज दिया गया है। राज्य को निर्देश दिया गया है कि वह कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और केंद्रीय जल आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक बदलाव करके रिपोर्ट को दोबारा जमा करे।
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