तमिलनाडु सरकार अपने प्राकृतिक संसाधन विभाग में बड़े पैमाने पर बदलाव करने जा रही है। इसके तहत खनिज संचालन का डिजिटलीकरण और ऑनलाइन निगरानी की जाएगी, ताकि आने वाले वर्षों में राजस्व को दोगुना किया जा सके। अधिकारियों का अनुमान है कि इन सख्त नियमों और बेहतर निगरानी से पहले वर्ष में वार्षिक आय लगभग 6,500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य 9,000 करोड़ रुपये का रखा गया है।
वर्ष 2025-26 के दौरान विभाग ने खनन पट्टा शुल्क, प्रमुख खनिजों, भूमि कर, रॉयल्टी और ग्रीन फंड व डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट में योगदान के माध्यम से लगभग 4,500 करोड़ रुपये अर्जित किए थे। वर्तमान में, पट्टे वाली और गैर-पट्टे वाली दोनों तरह की जमीनों से निकाले जाने वाले खनिजों का एक बड़ा हिस्सा भूमि कर के दायरे से बाहर है, जिससे इन संसाधनों पर रॉयल्टी की वसूली नहीं हो पा रही है।
इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों में निर्माण सामग्री के परिवहन पर लगाए गए तीन महीने के प्रतिबंध के कारण ऐसी सामग्रियों की आवाजाही में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
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