तमिलनाडु सरकार ने 23 वर्षों के बाद खुदरा शराब कारोबार से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार अब इन दुकानों के संचालन को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इस बदलाव की शुरुआत निगमों और नगर पालिकाओं से की जाएगी। सरकार का कहना है कि शराब की दुकानों के प्रबंधन में गरिमा की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया है।
इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में 'प्रोहिबिशन एंड एक्साइज एक्ट' में आवश्यक कानूनी संशोधन पेश किए जाएंगे। राज्य में वर्तमान में 4,048 Tasmac आउटलेट संचालित हैं, जिनमें से लगभग 2,500 दुकानों और बार का निजीकरण किया जाएगा। पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर सरकार अब निजी संचालकों से लाइसेंस शुल्क वसूलने की व्यवस्था अपनाएगी। वित्त वर्ष 2024-25 में इन दुकानों से उत्पाद शुल्क और वैट के जरिए 48,344 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। निजीकरण के बाद संभावित वित्तीय बदलावों को देखते हुए सरकार राजस्व के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार कर रही है।
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