नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण आई भीषण बाढ़ में नेपाल में कम से कम 359 लोगों की मौत हो गई है, जबकि तिब्बत में तीन लोगों ने जान गंवाई है। इस आपदा में सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिक भी शामिल हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नदियों में जमा मलबे के कारण भविष्य में और बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को बुनियादी ढांचे की बहाली तथा विस्थापित परिवारों को तत्काल सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। ब्रिटेन सरकार ने 5 मिलियन पाउंड की सहायता की घोषणा की है और अपने नागरिकों की मदद के लिए कांसुलर स्टाफ तैनात किया है। वहीं, भारत अपने फंसे हुए नागरिकों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए काम कर रहा है।
सड़कें, पुल और घर बह जाने के कारण बचाव दलों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह आपदा लांगटांग लिरुंग के उत्तरी हिस्से से बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने के कारण हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह के उच्च-पर्वतीय खतरे लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।


