तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग ने मंदिरों में बेचे जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। ठेकेदारों के माध्यम से प्रसाद बिक्री में अनियमितताओं और खराब गुणवत्ता की शिकायतों के बाद, विभाग ने अब मंदिरों को स्वयं प्रसाद तैयार करने और बेचने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आयुक्त विनय ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
नए नियमों के तहत लड्डू, अतिरसम और तेनकुझल जैसे प्रसाद की उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य निर्धारित कर दिए गए हैं। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केवल 'आविन' घी और सहकारी दुकानों से खरीदे गए सामान का ही उपयोग करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, प्रसाद के पैकेट पर निर्माण तिथि, वजन, मूल्य और मंदिर का पता अंकित करना आवश्यक कर दिया गया है।
छोटे मंदिरों के लिए रसोई के रखरखाव और उत्पादन प्रबंधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, प्रसाद निर्माण से जुड़े खर्चों का ब्योरा रखना और उसे विभाग के अधिकारियों से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा। इस कदम से भक्तों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रसाद मिलना सुनिश्चित होगा।



