केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म सेंसरशिप और प्रमाणन के नियमों में 35 वर्षों में पहली बार व्यापक संशोधन किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा, यौन शोषण या आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली सामग्री पर रोक लगाई गई है। अब फिल्मों में बच्चों को हिंसा के शिकार, अपराधी या गवाह के रूप में नहीं दिखाया जा सकेगा।
अद्यतन नियमों के अनुसार, नशीले पदार्थों के सेवन या तस्करी को दर्शाने वाली फिल्मों में यह अनिवार्य चेतावनी देना आवश्यक होगा कि अवैध पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और इनके सेवन से जेल हो सकती है। इसके अलावा, दिव्यांगों का अपमान करने या जानवरों के प्रति अनावश्यक क्रूरता दिखाने वाली सामग्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली या अन्य देशों के साथ भारत के राजनयिक संबंधों को प्रभावित करने वाली सामग्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही, फिल्म निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि अपराध करने के तरीकों को इस तरह न दिखाया जाए कि वे दर्शकों के लिए निर्देश या महिमामंडन का काम करें।


