TNPSC ग्रुप 4 परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था और तमिलनाडु के विकास प्रशासन (यूनिट V) के तहत जीडीपी (GDP), राष्ट्रीय आय और आर्थिक क्षेत्रों की बुनियादी अवधारणाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। किसी देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए जीडीपी, राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय जैसे मानक उपयोग किए जाते हैं। 27 फरवरी 2026 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए जीडीपी की नई गणना श्रृंखला जारी की है। 5 जून 2026 के अनंतिम अनुमानों के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.7% रही है और नाममात्र जीडीपी लगभग 346.36 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, खनन), द्वितीयक क्षेत्र (विनिर्माण, निर्माण) और तृतीयक क्षेत्र (सेवाएं)। जीडीपी एक निश्चित अवधि के भीतर देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है। इसे उत्पादन, आय और व्यय विधियों द्वारा मापा जा सकता है। तमिलनाडु के संदर्भ में, राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को GSDP कहा जाता है। राज्य योजना आयोग के 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2024-25 के लिए तमिलनाडु का नाममात्र GSDP लगभग 31.19 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें सेवा क्षेत्र का योगदान 53.6% रहा।
आर्थिक विकास और वृद्धि के बीच अंतर को समझना आवश्यक है, जहाँ विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार भी शामिल है। जीडीपी की गणना में दोहरी गणना से बचने के लिए केवल अंतिम वस्तुओं के मूल्य को जोड़ा जाता है। इसके अतिरिक्त, नाममात्र जीडीपी और वास्तविक जीडीपी के बीच का अंतर मूल्य परिवर्तन के प्रभाव को हटाकर वास्तविक उत्पादन वृद्धि को दर्शाता है। परीक्षा की तैयारी के लिए कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक का 'सकल घरेलू उत्पाद और उसका विकास' अध्याय प्राथमिक स्रोत के रूप में अनुशंसित है।

