राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल जारी रहेगा, लेकिन संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत के कारण उनकी शक्तियां काफी सीमित हो गई हैं। 90 सीटों के साथ डेमोक्रेट्स किसी भी विधेयक को पारित होने से रोकने की स्थिति में हैं, जिससे ट्रंप के लिए कानून बनाना मुश्किल होगा। इसके अलावा, बजट पर संसद का नियंत्रण होने के कारण ट्रंप की 'MAGA' परियोजनाओं और दीवार निर्माण जैसे कार्यों के लिए धन जुटाना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
ट्रंप के सामने महाभियोग का खतरा भी बना हुआ है, क्योंकि डेमोक्रेट्स उनके खिलाफ जांच शुरू कर सकते हैं। साथ ही, न्यायाधीशों और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति के लिए उन्हें सीनेट की मंजूरी की आवश्यकता होगी, जहां उनके उम्मीदवारों को रोका जा सकता है। व्यापार समझौतों और युद्ध के लिए धन आवंटन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में भी संसद की सहमति अनिवार्य है। संक्षेप में, ट्रंप व्हाइट हाउस में तो बने रहेंगे और कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे, लेकिन संसद और अदालतें उन्हें पलटने में सक्षम होंगी, जिससे वे व्यावहारिक रूप से शक्तिहीन राष्ट्रपति बनकर रह गए हैं।

