तमिलनाडु सरकार ने औद्योगिक उपयोग के लिए बंजर भूमि के रूपांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कृषि विभाग की अनिवार्य मंजूरी की शर्त को हटा दिया है। 2017 के भूमि उपयोग नियमों में किए गए इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राज्य में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना और परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी दिलाना है।
नए नियमों के तहत, अब नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशक राजस्व रिकॉर्ड और सैटेलाइट इमेजरी की जांच के बाद सीधे आवेदन को मंजूरी दे सकेंगे। इसके चलते अब कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने की आवश्यकता नहीं होगी, जिसके लिए पहले कम से कम तीन वर्षों तक खेती न होने का प्रमाण देना अनिवार्य था। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से विशेष रूप से टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगीकरण को गति मिलेगी।
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