यूके मेट ऑफिस ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा एल नीनो अब तक का सबसे शक्तिशाली घटनाक्रम हो सकता है। वर्तमान में इस क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक है, जिसके इस साल के अंत तक 3 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक अभूतपूर्व स्थिति है जो 19वीं सदी के बाद के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
यह जलवायु घटना समुद्र से वायुमंडल में भारी मात्रा में गर्मी छोड़ती है, जिससे वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि की आशंका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर यह स्थिति वर्ष 2027 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बना सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने स्पष्ट किया है कि हालांकि जलवायु परिवर्तन से एल नीनो की आवृत्ति बढ़ने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, लेकिन गर्म होती दुनिया में इसके प्रभाव अधिक चरम होते जा रहे हैं।
एल नीनो के कारण वैश्विक मौसम चक्र पहले ही प्रभावित होने लगा है, जिसके चलते भारत में मानसून की बारिश में कमी और अटलांटिक में तूफान की गतिविधियों में बदलाव देखा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सूखे, जंगल की आग और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जबकि यूके में पतझड़ के दौरान भारी बारिश और तूफानी मौसम की संभावना है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस घटना की तीव्रता नए रिकॉर्ड स्थापित करने की ओर अग्रसर है।






