नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ युवा वर्तमान में शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हैं। 2021 के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि ये युवा गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि शिक्षा पर निवेश करने के बावजूद उनके पास आय का कोई साधन नहीं है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए पारंपरिक डिग्री के साथ अतिरिक्त कौशल पाठ्यक्रम करना आर्थिक रूप से कठिन है। इस कारण कई स्नातक परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कम वेतन वाली नौकरियों को स्वीकार करने को मजबूर हैं, जबकि कुछ कार्यबल में शामिल ही नहीं हो पा रहे हैं। वर्तमान में केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी योग्यता के अनुरूप भूमिकाओं में कार्यरत हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीति आयोग ने स्थानीय मांग और उभरते क्षेत्रों के अनुरूप सब्सिडी वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वित्तीय सहायता की सिफारिश की है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि देश के विकास के लिए शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के साथ जोड़ना अनिवार्य है।


