लोकसभा सांसद ज्योतिमणि ने कहा है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के पहनावे पर सवाल उठाना पितृसत्तात्मक मानसिकता और सामाजिक हिंसा का प्रतीक है। मंत्री कीर्तना से जुड़े एक वायरल वीडियो और उस पर हो रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के पहनावे को लेकर समाज का नजरिया ही समस्या है, न कि उनका पहनावा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रही महिला कीर्तना नहीं हैं।
ज्योतिमणि ने तर्क दिया कि समय के साथ पुरुषों के पहनावे और तौर-तरीकों में आए बदलावों को कभी इस तरह की जांच का सामना नहीं करना पड़ा, जबकि महिलाओं के हर कदम और कपड़ों को लगातार निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के शरीर और पहनावे को लेकर की जाने वाली टिप्पणी आलोचना नहीं, बल्कि उन्हें केवल एक वस्तु के रूप में देखने की संकीर्ण मानसिकता है।
सांसद ने कीर्तना के साहस की सराहना करते हुए कहा कि आज की महिलाएं इन अपमानजनक टिप्पणियों से डरने के बजाय उनका डटकर सामना कर रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं के विचारों और कार्यों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उनके शरीर को निशाना बनाना पूरी तरह से गलत है और इस सोच को बदलने की आवश्यकता है।


