डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त आव्रजन और वीजा नीतियों के कारण शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदनों में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इन नई नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। कॉमन ऐप के आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च तक कुल अंतरराष्ट्रीय आवेदनों में 10 प्रतिशत की कमी आई है।
NAFSA और JB इंटरनेशनल के शोध के मुताबिक, इन बदलावों से शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के पंजीकरण में 1.1 लाख की कमी आ सकती है। इससे विदेशी छात्रों का आर्थिक योगदान 41.77 अरब डॉलर से घटकर 38.37 अरब डॉलर होने का अनुमान है। नए नियमों में छात्र वीजा की अवधि को चार साल तक सीमित करना और वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) कार्यक्रम के लिए 1 लाख डॉलर का प्रस्तावित शुल्क शामिल है। वर्ष 2024-25 में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों के नामांकन के साथ, भारत अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, जिससे यह गिरावट दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है।




