मध्य नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ के कारण कम से कम 579 लोगों की मौत हो गई है, जबकि लगभग 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। बुधवार को आई इस आपदा ने सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। रेड क्रॉस के अनुसार, इस त्रासदी से 90,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में 7,400 से अधिक सुरक्षाकर्मी बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
आपदा स्थल पर एक नई झील बनने के कारण जलस्तर फिर से बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन ने बाढ़ की नई चेतावनी जारी की है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, वहां करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो गया है, जिससे खतरे की आशंका बढ़ गई है। भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। तिब्बत में भी बाढ़ से पांच लोगों की मौत हुई है और 558 लोग लापता हैं।
भारत राहत कार्यों में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है और फंसे हुए नागरिकों को निकालने में मदद कर रहा है। नेपाल ने परिवहन संपर्क बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में सहायता का अनुरोध किया है।



