वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में चीन, अमेरिका और भारत दुनिया में सबसे आगे हैं। वर्ष 2024 में चीन का उत्सर्जन 13,125 मेगा टन दर्ज किया गया है, जो वैश्विक स्तर का 33.12 प्रतिशत है। इस सूची में अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत 3,154 मेगा टन उत्सर्जन के साथ तीसरे पायदान पर बना हुआ है।
भारत का कुल उत्सर्जन अधिक होने के बावजूद, प्रति व्यक्ति उत्सर्जन केवल 2.19 टन है, जो अमेरिका और रूस जैसे देशों की तुलना में काफी कम है। रूस, जापान, ईरान और इंडोनेशिया इस सूची में क्रमशः अगले स्थानों पर हैं। जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग और औद्योगिक विकास को इस उत्सर्जन वृद्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और स्वच्छ तकनीकों को अपनाना अनिवार्य है। कार्बन उत्सर्जन को कम करना अब सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है।

