नागापट्टिनम जिले में इस वर्ष कुरुवई धान की पैदावार में 96 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, पिछले वर्ष के 1.30 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस बार खरीद केवल 5,000 मीट्रिक टन तक सीमित रहने की संभावना है। इस गिरावट का मुख्य कारण मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने में देरी, कम वर्षा और भूजल का खारा होना बताया गया है।
जिले में धान की खेती का रकबा 30,000 हेक्टेयर से घटकर मात्र 1,720 हेक्टेयर रह गया है, जिसके चलते प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों की संख्या भी 120 से घटाकर 12 कर दी गई है। किसानों का कहना है कि भीषण गर्मी और सिंचाई के अभाव में फसलें सूख गई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
आगामी सांबा सीजन को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। तमिलनाडु किसान संरक्षण संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि मेट्टूर बांध से वर्तमान में छोड़ा जा रहा पानी अपर्याप्त है। उन्होंने भविष्य की खेती के लिए पानी की निकासी को बढ़ाकर कम से कम 22,000 क्यूसेक प्रतिदिन करने की मांग की है।

