तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बिजली कटौती और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। चेन्नई, त्रिची, मदुरै और कोयंबटूर जैसे शहरों में आम जनता, लघु उद्योगों और किसानों ने बताया है कि बिजली आपूर्ति में बाधाओं के कारण उनका दैनिक जीवन और कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। 18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बिजली कटौती से लघु उद्योगों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान और अतिरिक्त ईंधन खर्च का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, किसान सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर हैं और वोल्टेज की समस्या से उनके उपकरण खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
बिजली बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में बिजली की मांग में भारी वृद्धि हुई है। 1 सितंबर को बिजली की खपत 436.97 मिलियन यूनिट थी, जो पिछले साल इसी दिन 375.68 मिलियन यूनिट थी। 2 सितंबर को यह खपत 457.18 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मांग बढ़ने के साथ-साथ पवन ऊर्जा उत्पादन में कमी भी इस संकट का कारण है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने खुले बाजार से 2,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने का निर्णय लिया है और वरिष्ठ अधिकारी आपूर्ति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
मुख्यमंत्री विजय की सरकार के लिए यह शुरुआती प्रशासनिक चुनौतियों में से एक है। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन सहित अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर रहे हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर शिकायतों का बने रहना सरकार के लिए चिंता का विषय है। आने वाले हफ्तों में बिजली आपूर्ति कितनी जल्दी सामान्य होती है, यह विजय सरकार के प्रशासनिक कौशल के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।


