मलेशिया के नेशनल यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे तमिलनाडु के छात्र भारतीदासन रमन और राज्य सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के बीच स्कॉलरशिप को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीदासन का आरोप है कि दूसरे वर्ष की शोध राशि न मिलने से उनका शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि 'अन्नल अंबेडकर ओवरसीज हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप' के तहत अब तक कुल 48 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिसमें पहले वर्ष के लिए 36 लाख और दूसरे वर्ष के लिए 12 लाख रुपये शामिल हैं।
विवाद का मुख्य बिंदु दूसरे वर्ष के शोध खर्च के लिए मांगे गए 19.50 लाख रुपये हैं। सरकार का तर्क है कि छात्र द्वारा प्रस्तुत खर्चों के विवरण के लिए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या विभागाध्यक्ष की आवश्यक सिफारिश का अभाव है। साथ ही, पहले वर्ष के 8.18 लाख रुपये के खर्चों के बिल और भुगतान प्रमाणों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके विपरीत, भारतीदासन का कहना है कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए हैं और बार-बार सवाल उठाए जाने से उनका शोध कार्य छह महीने से रुका हुआ है।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब तमिलनाडु सरकार ने सीधे मलेशियाई विश्वविद्यालय को ईमेल भेजकर शोध उपकरणों और खर्चों की आवश्यकता के बारे में पुष्टि मांगी है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि विश्वविद्यालय से आधिकारिक जवाब और सिफारिश मिलने के बाद ही शेष राशि जारी की जाएगी। अब पूरी स्थिति विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया पर निर्भर है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि शोध निधि के वितरण में आ रही बाधाएं कब दूर होंगी।


