सोशल मीडिया पर एक दुकान की मूल्य सूची वायरल हो रही है, जिसमें नकद, UPI और क्रेडिट कार्ड के लिए अलग-अलग कीमतें तय की गई हैं। चीनी के लिए नकद पर 60 रुपये, UPI पर 61 रुपये और क्रेडिट कार्ड पर 62 रुपये की दरें दर्शाई गई हैं। हालांकि दुकान की पहचान स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसने डिजिटल लेनदेन की लागत को ग्राहकों पर डालने को लेकर बहस छेड़ दी है। इस बीच, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर है और बैंक इसे सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किए गए हैं।
व्यावहारिक स्तर पर चिंता यह है कि क्या व्यापारी इस लागत को वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि या 'कैश डिस्काउंट' के जरिए ग्राहकों से वसूलेंगे। खुदरा व्यापार संगठनों ने भी तर्क दिया है कि कम लाभ मार्जिन वाले व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ होगा। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि 96% मर्चेंट UPI लेनदेन इस नए MDR नियम से प्रभावित नहीं होंगे। असली चुनौती यह है कि क्या व्यापारी अपनी परिचालन लागत के हिस्से के रूप में इस शुल्क को वस्तुओं के दाम में जोड़ेंगे, जिससे अंततः आम जनता पर ही आर्थिक बोझ पड़ेगा। यह स्पष्ट है कि MDR का वास्तविक प्रभाव नियम लागू होने के बाद ही सामने आएगा।

