जेम ग्रुप के चेयरमैन और जेम ग्रेनाइट्स के संस्थापक आर. वीरमणि के खिलाफ पोक्सो मामला अक्टूबर 2025 में एक वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ। एक बाल अधिकार कार्यकर्ता द्वारा चेन्नई पुलिस को सौंपे गए इस वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति को नाबालिग लड़की का यौन शोषण करते हुए दिखाया गया था। पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन प्रारंभिक जांच में पर्याप्त सबूत न मिलने का हवाला देते हुए एंटी-वाइस स्क्वाड ने मामला बंद करने की रिपोर्ट दी थी। हालांकि, 19 अगस्त 2026 को विशेष पोक्सो अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर आगे की जांच के निर्देश दिए।
अदालत के हस्तक्षेप के बाद हुई नई जांच में पुलिस ने चेन्नई के तेयनमपेट स्थित एक घर की पहचान की, जिसे वीरमणि ने किराए पर लिया था और इसका प्रबंधन शांति और उनके पति महेंद्र सिम्हन करते थे। 29 अगस्त 2026 को पुलिस ने वीरमणि, शांति और महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दावा किया है कि वीडियो में दिख रही पीड़िता की पहचान कर ली गई है, जिसने वीरमणि की पहचान की है। इसके अलावा, सात अन्य महिलाओं ने भी वीरमणि पर नाबालिग होने के दौरान शोषण के आरोप लगाए हैं।
जांच अब वीरमणि से जुड़ी अन्य संपत्तियों और लगभग 70 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन की दिशा में बढ़ रही है। शांति ने भी आरोप लगाया है कि वीरमणि ने 13 साल की उम्र में उनका शोषण किया था। फिलहाल, पुलिस मामले की शुरुआती जांच में हुई खामियों की भी पड़ताल कर रही है। सभी आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं और उन पर लगे आरोप अदालत में साबित होने बाकी हैं।





