न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने ईरान को दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद प्रायोजक करार दिया, लेकिन साथ ही यह भी दावा किया कि वाशिंगटन के प्रयासों के चलते अब ईरान मध्य पूर्व में पहले की तरह दबदबा नहीं बना पा रहा है।
ट्रंप ने भविष्य के संबंधों के लिए दो रास्ते सुझाए हैं, जिसमें या तो ईरान के साथ बातचीत के जरिए समझौता करना शामिल है या फिर त्वरित सैन्य हस्तक्षेप। उन्होंने उम्मीद जताई कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के साथ द्विपक्षीय समझौता संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ईरान के हित में यही होगा कि वह बातचीत की मेज पर आए।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने व्यावसायिक समुद्री जहाजों पर हमलों की निंदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सराहना की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से पेट्रोलियम परिवहन को सुरक्षित रखने में अमेरिकी नौसेना की भूमिका पर भी जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर हथियारों का निर्माण कर रहा है।


