भारत सरकार ने एलन मस्क के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि कुछ 'कुलीन वर्ग' दूरसंचार क्षेत्र में एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को देश में प्रवेश करने से रोक रहे हैं। संचार मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि देश का उपग्रह संचार नियामक ढांचा पूरी तरह निष्पक्ष और भेदभाव रहित है।
मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में तीन कंपनियों को उपग्रह सेवाएं प्रदान करने का लाइसेंस दिया गया है और सभी को समान अनिवार्य सुरक्षा जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। सरकार ने जोर देकर कहा कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया में किसी भी इकाई को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी गई है।
इससे पहले मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दावा किया था कि अज्ञात दूरसंचार कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए स्टारलिंक को बाधित किया जा रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने कहा कि नियमों के अनुचित अनुप्रयोग का सुझाव पूरी तरह से निराधार और गलतफहमी पर आधारित है।




