तमिल सिनेमा के दिग्गज संगीतकार और प्रशंसकों के बीच 'थेनिसाई थेन्ड्रल' के नाम से लोकप्रिय देवा (75) का आज, 17 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से तमिल फिल्म जगत और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर है। 20 नवंबर 1950 को जन्मे देवा का मूल नाम देवनाथन चोक्कलिंगम था। चेन्नई के मायलापुर में एक साधारण पृष्ठभूमि में पले-बढ़े देवा ने संघर्षों के बावजूद संगीत के प्रति अपने जुनून को जीवित रखा और मंच कार्यक्रमों से होते हुए फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
देवा ने 1980 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और 1989 की फिल्म 'मनसुक्खेथा महाराजा' से चर्चा में आए। 1990 में 'वैगासी पोरंधाचु' की सफलता ने उन्हें तमिल सिनेमा का एक प्रमुख संगीतकार बना दिया। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में 400 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया। रजनीकांत की 'अन्नामलाई', 'बाशा' और 'अरुणाचलम' जैसी फिल्मों में उनके संगीत और बैकग्राउंड स्कोर ने सुपरस्टार की छवि को और मजबूती दी। इसके अलावा, उन्होंने अजीत और विजय के करियर के शुरुआती दौर में 'आसाई', 'काधल कोट्टई', 'वाली' और 'कुशी' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में यादगार संगीत दिया।
देवा को उत्तर चेन्नई की 'गाना' शैली को मुख्यधारा के सिनेमा में लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्हें 1990 में 'वैगासी पोरंधाचु' के लिए तमिलनाडु सरकार का सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार और 1992 में 'कलाईमामणि' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कन्नड़ फिल्म 'अमृत वर्षिणी' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता। उनके परिवार में संगीत की विरासत उनके बेटे श्रीकांत देवा और भाई सबेश-मुरली के माध्यम से आगे बढ़ रही है। भले ही देवा अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा रचित कालजयी धुनें आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।




