तमिलनाडु की राजनीति में हर साल 30 अक्टूबर का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह स्वतंत्रता सेनानी और नेता पसुमपोन मुथुरामलिंगम थेवर की जयंती और पुण्यतिथि है। रामनाथपुरम जिले के पसुमपोन में स्थित उनके स्मारक पर हर साल विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 1908 में जन्मे थेवर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रभावित थे और फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रमुख नेता रहे। उन्होंने औपनिवेशिक शासन के दौरान 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' के खिलाफ संघर्ष किया और दलितों के मंदिर प्रवेश का समर्थन किया। 1963 में इसी दिन उनका निधन हुआ था।
थेवर का दक्षिण तमिलनाडु के मुक्कुलथोर समुदाय (कल्लार, मरवर और अगामुदियार) में गहरा प्रभाव है। राजनीतिक दल उन्हें श्रद्धांजलि देकर इस समुदाय के मतदाताओं के साथ अपना जुड़ाव बनाए रखने का प्रयास करते हैं। हालांकि वे किसी विशिष्ट दल से नहीं थे, लेकिन एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकारों ने उन्हें विशेष सम्मान दिया, जिसमें जयललिता द्वारा उनकी प्रतिमा के लिए स्वर्ण कवच भेंट करना शामिल है। द्रमुक (DMK) और भाजपा भी उनके राष्ट्रवादी योगदान और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को देखते हुए उन्हें सम्मान देती हैं।
उनके इतिहास में 1957 के मुदुकुलाथुर जाति संघर्ष और इमैनुएल सेकरन की हत्या का विवाद भी शामिल है, जिसमें थेवर पर आरोप लगे थे, लेकिन बाद में वे अदालत से बरी हो गए थे। आज थेवर जयंती केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि तमिलनाडु के इतिहास, सामाजिक पहचान और चुनावी राजनीति के अंतर्संबंधों को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि यह आयोजन समुदाय के साथ संबंध मजबूत करने का माध्यम है, लेकिन चुनावी परिणाम केवल इसी पर निर्भर नहीं करते, क्योंकि मतदाता शिक्षा, रोजगार और स्थानीय मुद्दों जैसे अन्य कारकों को भी महत्व देते हैं।
