वैश्विक स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे इसकी औसत कीमत 32 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई है। जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में गैस का भंडार पिछले वर्ष के 83 प्रतिशत के मुकाबले घटकर 75 प्रतिशत रह गया है। आपूर्ति को लेकर बनी यह चिंता कीमतों में उछाल का मुख्य कारण है, जिससे सर्दियों के मौसम में भारत के लिए गैस की वहनीयता पर संकट मंडरा रहा है।
भारतीय तेल विपणन कंपनियों के लिए कच्चे तेल की खरीद लागत भी लगातार उच्च बनी हुई है। इसका कारण माल ढुलाई की बढ़ी हुई दरें और रूसी तेल पर मिलने वाली छूट में आई भारी कमी है। फरवरी में रूसी यूराल क्रूड पर 14 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिल रही थी, जो अब घटकर मात्र 2 डॉलर रह गई है, जबकि माल ढुलाई का खर्च संघर्ष-पूर्व स्तर से लगभग आठ गुना अधिक है। इस स्थिति के चलते भारतीय कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हालांकि, मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधित होने के कारण पेट्रोकेमिकल मार्जिन में फरवरी के अंत से 55 प्रतिशत का सुधार देखा गया है। जेफरीज का मानना है कि निकट भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला के सामान्य होने की संभावना कम है, ऐसे में यह बढ़ा हुआ मार्जिन रिलायंस जैसी कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2027 तक लाभप्रदता बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।

