संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पैरिला के बीच उस समय तीखी नोकझोंक हो गई, जब क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर वार्षिक बहस चल रही थी। घटना तब हुई जब वॉल्ट्ज के संबोधन के दौरान क्यूबाई राजनयिक मंच की ओर बढ़ गए।
वॉल्ट्ज ने क्यूबाई प्रतिनिधि को पीछे हटने का निर्देश देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र कोई कम्युनिस्ट तानाशाही नहीं है और वह किसी भी दबाव में नहीं आएंगे। उन्होंने क्यूबा सरकार पर भ्रष्टाचार और दमन का आरोप लगाते हुए सदस्य देशों से प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को खारिज करने का आग्रह किया।
जवाब में रोड्रिग्ज ने अमेरिकी राजदूत पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और उनकी टिप्पणियों को इस मंच की गरिमा के विपरीत बताया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महासभा के अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल को अपनी बात रखने का औपचारिक अवसर दिया जाएगा।


