एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि उत्तरी अटलांटिक महासागर में उत्पन्न हुआ 'अटलांटिक कोल्ड ब्लब' नामक एक अजीबोगरीब ठंडा क्षेत्र भारतीय मानसून की दिशा बदल रहा है। अमेरिका के पर्ड्यू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक निम्मागड्डा महेंद्र के नेतृत्व में एक शोध दल का कहना है कि ग्रीनलैंड के ग्लेशियरों के पिघलने से अटलांटिक महासागरीय धाराएं कमजोर हो रही हैं, जिससे यह ठंडा क्षेत्र बन रहा है। यह वायुमंडलीय तरंगों के माध्यम से भारतीय मानसून की वर्षा को प्रभावित कर रहा है।इस बदलाव के कारण, 1999 से उत्तर-पश्चिमी भारत में वर्षा में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं, कृषि प्रधान इंडो-गंगा के मैदान में वर्षा कम हुई है और सूखे की स्थिति बनी हुई है। वैज्ञानिक महेंद्र ने सवाल उठाया है कि यदि वर्तमान मौसम अनुसंधान कंप्यूटर अटलांटिक महासागर में हो रहे इन परिवर्तनों का पता नहीं लगा सकते हैं, तो उनके द्वारा अनुमानित भविष्य की मौसम रिपोर्टों पर पूरी तरह से कैसे भरोसा किया जा सकता है।
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