भारत में पिछले सात वर्षों के दौरान हृदय रोग से पीड़ित लोगों की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ गई है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के नवीनतम सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के युवा भी हृदय रोग के प्रति संवेदनशील हैं।हृदय रोगों का प्रभाव उम्र के साथ तेजी से बढ़ता है। जहां 0-4 वर्ष की आयु में यह केवल 0.3 प्रतिशत और 5-14 वर्ष की आयु में 0.2 प्रतिशत है, वहीं 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के लिए यह बढ़कर 2.1 प्रतिशत और 30-44 वर्ष के लिए 15.3 प्रतिशत हो जाता है। यह 45-59 वर्ष की आयु वर्ग में 30.1 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक आयु वालों में 37.8 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि हृदय रोग अब देश में सबसे प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बनते जा रहे हैं।
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