तमिलनाडु सरकार द्वारा पेश किए गए नवीनतम बजट के बीच राज्य के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां उभरकर सामने आई हैं। भारत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, जिसका अनुमानित जीएसडीपी (GSDP) 35.29 लाख करोड़ रुपये है, राज्य भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है। वर्तमान में राज्य का राजस्व घाटा 78,324 करोड़ रुपये है और कुल बकाया कर्ज 10.43 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अगले वर्ष के लिए अनुमानित ब्याज भुगतान का बोझ 78,677 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, बेहतर प्रबंधन से राज्य प्रतिवर्ष 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटा सकता है। वर्तमान में राज्य का अपना कर संग्रह 2021-2022 के 10 प्रतिशत से घटकर 8.32 प्रतिशत रह गया है, जबकि जीएसटी संग्रह जीएसडीपी का मात्र 2.04 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर होने वाला खर्च कुल राजस्व प्राप्तियों का 61.7 प्रतिशत हिस्सा सोख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि स्टाम्प शुल्क, खनन परमिट और कर अनुपालन में सुधार लाकर राज्य इस वित्तीय अंतर को पाट सकता है और भविष्य के निवेश के लिए संसाधन जुटा सकता है।
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