चेन्नई में दूसरे हवाई अड्डे के निर्माण की मांग पिछले 27 वर्षों से जारी है, लेकिन यह परियोजना अब भी अधर में लटकी हुई है। वर्ष 2022 में परंदूर को इसके लिए स्थल के रूप में चुना गया था, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण अब तक आवश्यक 5,800 एकड़ भूमि में से केवल 1,700 एकड़ का ही अधिग्रहण हो पाया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने स्थल परिवर्तन की अटकलों के बीच इस परियोजना पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस देरी से राज्य की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर आधुनिक विमानन बुनियादी ढांचे के साथ आगे निकल गए हैं। चेन्नई का मौजूदा मीनांबक्कम हवाई अड्डा क्षमता की कमी, पार्किंग की समस्याओं और बड़े विमानों को संभालने में असमर्थता से जूझ रहा है, जिसके कारण यात्री यातायात रैंकिंग में चेन्नई छठे स्थान पर खिसक गया है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के प्रतिनिधियों का कहना है कि तमिलनाडु को 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा अनिवार्य है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह मौजूदा हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ नई परियोजना के गतिरोध को जल्द दूर करे, ताकि राज्य को आर्थिक और माल ढुलाई के क्षेत्र में पड़ोसी क्षेत्रों से पिछड़ने से बचाया जा सके।


