अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल आयात पर संभावित शुल्क से जुड़े व्यापारिक विवाद को सीधे बातचीत के जरिए सुलझाएंगे। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने दोनों नेताओं के बीच मजबूत कामकाजी संबंधों का हवाला देते हुए इस बात की पुष्टि की है। यह घटनाक्रम 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट द्वारा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पारित किए जाने के बाद सामने आया है।
86-11 के भारी बहुमत से पारित इस द्विदलीय कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के शीर्ष पांच उपभोक्ताओं पर 100 प्रतिशत तक विवेकाधीन शुल्क लगाने का अधिकार मिला है। इन देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। यह विधेयक 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने वाले देशों को लक्षित करता है।
भारत का रुख स्पष्ट है कि उसकी ऊर्जा खरीद घरेलू सुरक्षा जरूरतों और बाजार की ताकतों पर आधारित है। हालांकि नवारो ने पहले भारत की व्यापार नीतियों और पेट्रोलियम आयात की आलोचना की थी, लेकिन उनके हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि अब दोनों देशों के प्रमुख कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा खरीद की प्रकृति को लेकर लगाए गए आरोपों को पहले ही गलत बताकर खारिज कर दिया है।



