हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) सूचकांक के कमजोर होकर तटस्थ +0.18°C पर आने से भारत के मानसून पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। इससे अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। वहीं, प्रशांत महासागर का नीनो 3.4 सूचकांक रिकॉर्ड 2.8°C पर पहुंच गया है, जो 2015-16 के स्तर से भी अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगस्त में आईओडी के कमजोर होने के साथ अल नीनो का यह तीव्र रूप जलवायु के लिए एक नई और चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है।
वैश्विक मौसम के इस बदलाव के कारण भारत में मानसून का वितरण असमान हो गया है और अब तक सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज की गई है। जहां बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्रों के कारण पूर्वी भारत में बारिश हो रही है, वहीं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में लंबा सूखा पड़ा है। कृषि और जल संसाधनों पर पड़ने वाले अंतिम प्रभाव के लिए आगामी कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई नई मौसमी प्रणाली सक्रिय नहीं हुई, तो देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी का संकट और गहरा सकता है।






