यूनिवर्सिटी ऑफ अलाबामा एट बर्मिंघम के शोधकर्ताओं के एक प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार, मस्तिष्क ट्यूमर की सर्जरी के 100 दिनों के भीतर कोविड-19 वैक्सीन लगवाने वाले रोगियों की जीवित रहने की दर उन लोगों की तुलना में दोगुनी पाई गई, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया था। medRxiv.org पर प्रकाशित इस अध्ययन में 187 ग्लियोब्लास्टोमा रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें टीकाकृत समूह की औसत उत्तरजीविता 743 दिन रही, जबकि टीका न लगवाने वालों की संख्या 349 दिन थी। हालांकि, यह शोध अभी पीयर-रिव्यू प्रक्रिया से नहीं गुजरा है।
न्यूरोसर्जन जेम्स मार्कर ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन केवल एक संबंध को दर्शाता है, न कि कारण और प्रभाव को। वैज्ञानिकों का मानना है कि एमआरएनए (mRNA) टीके प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने के लिए तैयार कर सकते हैं, क्योंकि ग्लियोब्लास्टोमा कोशिकाओं के कुछ अणु कोरोना वायरस प्रोटीन के समान हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये परिणाम प्रारंभिक हैं और इन्हें वर्तमान उपचार योजनाओं या सर्जरी में देरी का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। शोधकर्ता अब बड़े समूहों में इन निष्कर्षों की पुष्टि करने और नैदानिक परीक्षणों की संभावना तलाशने पर काम कर रहे हैं।


