चेन्नई के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध विरासत को याद करने के लिए हर साल 22 अगस्त को 'मद्रास डे' मनाया जाता है। आधुनिक चेन्नई की नींव 22 अगस्त 1639 को रखी गई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिस डे और एंड्रयू कोगन ने विजयनगर साम्राज्य के प्रतिनिधियों से तटीय भूमि का अधिग्रहण कर फोर्ट सेंट जॉर्ज की स्थापना की थी। हालांकि, चेन्नई का इतिहास इससे कहीं अधिक प्राचीन है, क्योंकि मायलापुर, तिरुवल्लुकेनी और तिरुवोट्टियूर जैसे क्षेत्र सदियों से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। 1996 में शहर का नाम आधिकारिक तौर पर मद्रास से बदलकर चेन्नई कर दिया गया, लेकिन 'मद्रास' शब्द आज भी शहर की पुरानी यादों, वास्तुकला और जीवनशैली के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
आज चेन्नई दक्षिण भारत के प्रमुख आर्थिक, शैक्षिक, चिकित्सा और तकनीकी केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और फिल्म उद्योग में शहर का योगदान उल्लेखनीय है। मरीना बीच, कपालेश्वर मंदिर, रिपन बिल्डिंग और फोर्ट सेंट जॉर्ज जैसे स्थल शहर के विभिन्न कालखंडों की गवाही देते हैं। मद्रास डे का आयोजन केवल शहर के जन्मदिन को मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को चेन्नई की अनूठी संस्कृति और विरासत से जोड़ने का एक प्रयास है। इस अवसर पर शहर भर में हेरिटेज वॉक, फोटो प्रदर्शनी और ऐतिहासिक व्याख्यान जैसे विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो चेन्नई की प्राचीन परंपराओं और आधुनिक विकास के अनूठे संगम को प्रदर्शित करते हैं।

