ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। निकाय पर कुल 3,434 करोड़ रुपये की देनदारी है, जिसमें 29 जुलाई तक 1,929 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान और आगामी वर्ष के लिए 1,505 करोड़ रुपये के अनुमानित बिल शामिल हैं। बिना समर्पित फंडिंग या पूर्व वित्तीय मंजूरी के बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू करने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कॉरपोरेशन का राजस्व घाटा 2022-23 के 375 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,970 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
ग्रेटर चेन्नई कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. रामाराव ने बताया कि यह देनदारी मुख्य रूप से ठेकेदारों के लंबित बिलों से जुड़ी है। इस संकट से निपटने के लिए कॉरपोरेशन ने Receivables Exchange of India Ltd के माध्यम से 713 करोड़ रुपये के भुगतान की योजना बनाई है। साथ ही, निकाय 500 करोड़ रुपये का सरकारी अनुदान पाने, बैंक ऋण लेने और राजस्व बढ़ाने के लिए नगरपालिका भवनों को पट्टे पर देने पर विचार कर रहा है। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक ने भी लगभग 10 परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की पेशकश की है।



