वर्ष 2012 में हिग्स बोसोन की ऐतिहासिक खोज के बाद, CERN अब ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक, डार्क मैटर की जांच के लिए लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) को अपग्रेड कर रहा है। इसे 'हाई-ल्यूमिनोसिटी लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' में बदला जा रहा है, जिससे मौजूदा मशीन की तुलना में दस गुना अधिक डेटा प्राप्त होगा। CERN की महानिदेशक डॉ. मार्क थॉमसन ने इसे क्षमता में एक बड़ी छलांग बताया है, जो वर्तमान तकनीक के लिए अदृश्य कणों का पता लगाने में सहायक होगी।
डार्क मैटर के अलावा, CERN एंटीमैटर और हिग्स बोसोन के गुणों पर भी शोध कर रहा है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने फंसे हुए एंटीप्रोटोन के परिवहन का सफल प्रदर्शन किया है, जो यह समझने में मदद करेगा कि ब्रह्मांड में एंटीमैटर की तुलना में मैटर अधिक क्यों है। इस वैश्विक वैज्ञानिक प्रयास में लगभग 300 भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
भविष्य की योजनाओं के तहत, CERN 'फ्यूचर सर्कुलर कोलाइडर' विकसित कर रहा है। यह 91 किलोमीटर लंबा रिंग प्रोजेक्ट अगले पचास वर्षों तक भौतिकी के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्नत कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से शोधकर्ता अब स्टैंडर्ड मॉडल से आगे बढ़कर ब्रह्मांड के मूलभूत बलों को समझने का प्रयास कर रहे हैं।


