सऊदी अरब ने हुती विद्रोहियों द्वारा मक्का शहर को निशाना बनाकर भेजे गए एक ड्रोन को मार गिराने के बाद वहां आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने शहर के दक्षिण में इस ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। हालांकि, हुती समूह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत बताया और दावा किया कि उनके अभियान केवल सैन्य और तेल प्रतिष्ठानों तक सीमित हैं। मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा एक 'रेड लाइन' है।
इस घटना ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल ही में हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' की परीक्षा ली है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले की निंदा की है, लेकिन इस्लामाबाद ने समझौते की परिचालन स्थिति का हवाला देते हुए सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सऊदी अरब पर हमलों का जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन क्षेत्रीय कूटनीतिक और आर्थिक हितों के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है।
तनाव के बीच, खबरें हैं कि सऊदी अरब ने हुती गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के माध्यम से इजरायल से खुफिया सहायता मांगी है। रियाद और तेल अवीव के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध न होने के बावजूद, सऊदी अरब अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए इस सहयोग का उपयोग कर रहा है। वहीं, हुती प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने दावा किया कि सऊदी हवाई हमले यमन में जारी हैं, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा गया है।



