केंद्र सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है। इस फैसले पर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। इस बीच, नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि 100 रुपये के लेनदेन पर 40 पैसे का शुल्क देने से कोई मर नहीं जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि डिजिटल लेनदेन को लंबे समय तक मुफ्त नहीं रखा जा सकता और सर्वर रखरखाव व परिचालन लागत के कारण कंपनियां लंबे समय से शुल्क लगाने की मांग कर रही थीं।
सरकार की नई घोषणा के अनुसार, व्यक्तिगत लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि, रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसे विशिष्ट व्यावसायिक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क या अधिकतम 300 रुपये तक का शुल्क वसूला जाएगा।


