तमिलनाडु नागरिक आपूर्ति निगम ने धान खरीद में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए अब राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) स्तर पर सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य बिचौलियों और व्यापारियों द्वारा किसानों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने की गतिविधियों पर लगाम लगाना है। राज्य में वर्तमान में धान का खरीद मूल्य सामान्य किस्म के लिए 2,600 रुपये और बेहतरीन किस्म के लिए 2,750 रुपये प्रति क्विंटल है, जो पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक होने के कारण धांधली की आशंका बनी रहती है।
नई व्यवस्था के तहत, अब किसानों द्वारा जमा किए गए ई-अडंगल और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच आरडीओ करेंगे। पहले यह सत्यापन केवल ग्राम प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों (DPC) पर किया जाता था। इस अतिरिक्त निगरानी के कारण 2026 खरीफ विपणन सीजन के लिए कुछ केंद्रों के खुलने में देरी हुई है। 21 सितंबर तक 498 केंद्र चालू हो चुके थे, जबकि 24 सितंबर तक 200 और केंद्र खोलने की योजना है।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि खरीद केंद्रों पर आने वाले धान की मात्रा आधिकारिक तौर पर दर्ज खेती के रकबे के अनुरूप हो। इससे व्यापारियों द्वारा कर्ज में डूबे किसानों से कम दाम पर धान खरीदकर उसे मिलीभगत से एमएसपी पर बेचने की प्रथा पर रोक लगने की उम्मीद है।



