मई 2026 में सत्ता संभालने के बाद से मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार ने कई प्रशासनिक निर्णय लिए, लेकिन सार्वजनिक विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते उसे कई फैसलों को वापस लेना पड़ा या उन पर पुनर्विचार करना पड़ा। इनमें 1,200 करोड़ रुपये की नई सचिवालय परियोजना, मेलमा SIPCOT भूमि अधिग्रहण और कचरा प्रबंधन के निजीकरण से जुड़े टेंडर शामिल हैं।
चेन्नई के पट्टिनपक्कम में प्रस्तावित सचिवालय के लिए स्थान पर मछुआरा समुदाय के विरोध के बाद सरकार अब वैकल्पिक जगहों पर विचार कर रही है, हालांकि परियोजना रद्द नहीं हुई है। इसके अलावा, तिरुवन्नामलाई में मेलमा SIPCOT के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना और कचरा प्रबंधन के लिए जारी टेंडर भी वापस ले लिए गए हैं। साथ ही, छात्रों के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने पर रोक लगाने वाला आदेश और मुख्यमंत्री के OSD के रूप में एक ज्योतिषी की नियुक्ति को भी विवाद के बाद रद्द कर दिया गया।
विपक्ष का तर्क है कि ये बदलाव बिना पर्याप्त परामर्श के लिए गए फैसलों को दर्शाते हैं, जबकि सरकार का कहना है कि यह प्रशासन की जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। इन चार महीनों में लिए गए निर्णयों और उनके बाद हुई वापसी ने सरकार के कामकाज के तरीके पर एक नई बहस छेड़ दी है।


