मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने टिप्पणी की है कि पारिवारिक ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए 'हाउस हसबैंड' (घर संभालने वाले पति) की अवधारणा को अपनाना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि विवाह को महिलाओं के करियर में बाधा मानने के कारण आज के समय में विवाह से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे बदलने की जरूरत है।
तिरुवन्नामलाई के एक दंपति द्वारा दायर तलाक की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह सुझाव दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि जिस तरह 'हाउस वाइफ' की व्यवस्था समाज में प्रचलित है, उसी तरह 'हाउस हसबैंड' की व्यवस्था को भी एक नए सामान्य के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए ताकि विवाह और परिवार की संस्था को बचाया जा सके।


