तमिलनाडु में चावल की कीमतों में हुई भारी वृद्धि से आम जनता परेशान है। वर्तमान में 26 किलोग्राम चावल की एक बोरी खुदरा बाजार में 2,100 रुपये तक बिक रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन में कमी और विदेशों में चावल के निर्यात में बढ़ोतरी इस महंगाई के मुख्य कारण हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता के कारण धान की खेती प्रभावित हुई है, जिससे राज्य को अपनी जरूरतों के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कृषि व्यापार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की मांग अधिक है, ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा निर्यात पर नियंत्रण लगाने से ही कीमतों में कमी आ सकती है। हालांकि जमाखोरी को रोकने के प्रयास किए जा सकते हैं, लेकिन निर्यात संबंधी नीतिगत निर्णय केवल केंद्र सरकार ही ले सकती है।
चावल मिल सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि धान की कम आवक और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण दीपावली से पहले चावल की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। व्यापारी संघ ने स्पष्ट किया है कि सांबा फसल की कटाई पोंगल के दौरान ही होगी, इसलिए निकट भविष्य में कीमतों में गिरावट की संभावना कम है।



