हाल के दिनों में FSSAI द्वारा प्रमुख ब्रांडों के खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता संबंधी खामियां पाए जाने से उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई है। अगस्त में, Everest और LG के हींग उत्पादों में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर उनकी बिक्री पर रोक लगाई गई थी। LG के नमूनों में स्टार्च की मात्रा 15% से 32% तक पाई गई, जबकि सीमा केवल 1% थी। इसके बाद, 3 अक्टूबर को Nestlé के लो-फैट डेयरी व्हाइटनर को असुरक्षित और घटिया घोषित किया गया। साथ ही, Nestlé के शिशु पोषण उत्पाद में बायोटिन की मात्रा मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
ताजा मामले में, गोवा के एक रिसॉर्ट से लिए गए Everest जीरा पाउडर के नमूने में एज़ोक्सीस्ट्रोबिन और थियामेथोक्सम जैसे कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं। इसके चलते FSSAI ने संबंधित बैच को वापस मंगाने (रिकॉल) का आदेश दिया है। हालांकि, यह कार्रवाई केवल विशिष्ट बैच तक सीमित है, लेकिन बड़े ब्रांडों के उत्पादों में बार-बार सामने आ रही ये कमियां खाद्य सुरक्षा निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं है। रिकॉल की जानकारी आम उपभोक्ताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचनी चाहिए। बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी जैसे विवरणों का सार्वजनिक होना अनिवार्य है ताकि उपभोक्ता सचेत रह सकें। खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कंपनियों की जवाबदेही और उपभोक्ताओं की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


