तमिलनाडु गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, जहां राज्य के 15 प्रमुख बांधों में जल भंडारण घटकर उनकी कुल क्षमता का मात्र 35.36 प्रतिशत रह गया है। वर्तमान में इन जलाशयों में 68,266 मिलियन क्यूबिक फीट (mcft) पानी ही बचा है। चेन्नई की बात करें तो वहां जलापूर्ति करने वाले छह प्रमुख जलाशयों में क्षमता का केवल 37.6 प्रतिशत यानी 4,977 mcft पानी उपलब्ध है। इस स्थिति के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और अल नीनो के प्रभाव को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिससे कृषि और भूजल स्तर पर बुरा असर पड़ा है।
चेन्नई और कोयंबटूर जैसे शहरों में बोरवेल सूखने के कारण लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। पोलाची और उदुमलईपेट जैसे क्षेत्रों में किसानों को अपने नारियल के बागों को बचाने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 से 21 अक्टूबर के बीच आने वाला उत्तर-पूर्वी मानसून पर्याप्त बारिश नहीं लाता है, तो 2027 की पहली छमाही में स्थिति और भी विकट हो सकती है।
जल संसाधन विशेषज्ञ एस. जनकराजन ने जोर देकर कहा है कि इस आवर्ती संकट से निपटने के लिए अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी और व्यवस्थित समाधान की आवश्यकता है। हालांकि चेन्नई की मांग को पूरा करने के लिए डिसेलिनेशन प्लांट मददगार साबित होंगे, लेकिन अधिकारियों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल को रिचार्ज करने और जल आपूर्ति को स्थिर करने के लिए उत्तर-पूर्वी मानसून का बेहतर होना अनिवार्य है।

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