ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन द्वारा जारी किए गए टेंडरों के विश्लेषण से निविदाओं में हेरफेर का एक बड़ा मामला सामने आया है। सड़क मरम्मत और अम्मा उनावगम सुधार परियोजनाओं के लिए कई ठेकेदारों द्वारा एक समान निगेटिव बिड (negative bids) जमा करने का पैटर्न देखा गया है, जिससे प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो गई है।
उदाहरण के तौर पर, सड़क निर्माण कार्य के लिए पांच ठेकेदारों ने एक समान 1,00,227 रुपये की बोली लगाई, जबकि एक अन्य मामले में चार ठेकेदारों ने 1,67,045 रुपये की समान बोली जमा की। वलसरवक्कम में अम्मा उनावगम सुविधाओं के टेंडर में भी इसी तरह की मिलीभगत देखी गई। 'अरापोर इयक्कम' एनजीओ के कार्यकर्ता एम. राधाकृष्णन ने इसे स्पष्ट रूप से ठेकेदारों का कार्टेल बताया है।
कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अतिरिक्त सुरक्षा जमा राशि से बचने के लिए ठेकेदार अक्सर 4.9% से 14.99% के बीच निगेटिव बिड देते हैं। हालांकि सरकार समान बोली मिलने पर काम को कई ठेकेदारों में बांट देती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया सार्वजनिक परियोजनाओं की लागत कम करने के उद्देश्य से बनाई गई प्रतिस्पर्धी निविदा प्रणाली को कमजोर करती है।


