पूर्व मंत्री अंबिल महेश के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बिना उनके मुवक्किल के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है।
इस दलील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति लक्ष्मी नारायणन ने डीएमके से तीखा सवाल किया कि पार्टी ने राज्यपाल की शक्तियों के बारे में बात करना कब से शुरू किया। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जब डीएमके राज्यपाल के पद की तुलना 'बकरी की दाढ़ी' से कर चुकी है और इसे अनावश्यक मानती है, तो फिर इस मामले में राज्यपाल की अनुमति का तर्क क्यों दिया जा रहा है।


