तमिल व्याकरण में दो शब्दों के मेल को 'पुणर्चि' (संधि) कहा जाता है। इसमें पहले शब्द के अंतिम अक्षर और दूसरे शब्द के पहले अक्षर का मिलन होता है। संधि में पहले शब्द को 'निलैमोझी' और बाद में आने वाले शब्द को 'वरुमोझी' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, 'तमिल + अमुदम' में 'तमिल' निलैमोझी है और 'अमुदम' वरुमोझी है।
पुणर्चि मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: 'इयल्बु' (स्वाभाविक) और 'विकारम' (परिवर्तित)। जब शब्दों के जुड़ने पर कोई अक्षर परिवर्तन नहीं होता, तो उसे इयल्बु पुणर्चि कहते हैं (जैसे: मणि + मुडि = मणिमुडि)। वहीं, यदि जुड़ते समय अक्षरों में कोई बदलाव आता है, तो उसे विकार पुणर्चि कहा जाता है। विकार पुणर्चि तीन प्रकार की होती है: 'तोन्रदल' (नया अक्षर जुड़ना, जैसे: तमिल + ताय = तमिलत्-ताय), 'तिरिदल' (अक्षर का बदलना, जैसे: विल्ल + कोडि = विर्कोडि), और 'केदुदल' (अक्षर का लोप होना, जैसे: मरम + वेर = मरवेर)।
कभी-कभी एक ही संधि में एक से अधिक विकार हो सकते हैं, जैसे 'मरम + कट्टिल = मरक्कट्टिल', जहाँ 'म' का लोप (केदुदल) और 'क' का आगमन (तोन्रदल) दोनों हुआ है। TNPSC परीक्षाओं में शब्दों को सही ढंग से जोड़ने, तोड़ने और संधि संबंधी अशुद्धियों को पहचानने के लिए इन नियमों का ज्ञान अनिवार्य है। यह विषय तमिलनाडु समचौर शिक्षा के कक्षा 8 के पाठ्यक्रम का हिस्सा है।

