TNPSC Group 4 परीक्षा की तैयारी के लिए आज के सत्र में चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) के सिद्धांतों, सूत्रों और गणना की विधियों पर विस्तार से चर्चा की गई है। चक्रवृद्धि ब्याज का अर्थ है मूलधन के साथ-साथ पिछले अवधियों में अर्जित ब्याज पर भी ब्याज की गणना करना। इसे सरल शब्दों में 'ब्याज पर ब्याज' कहा जाता है। वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज के लिए मुख्य सूत्र A = P × (1 + R/100)^n है, जहाँ A कुल राशि, P मूलधन, R ब्याज दर और n समय है। चक्रवृद्धि ब्याज (CI) निकालने के लिए कुल राशि में से मूलधन घटाया जाता है (CI = A - P)।
परीक्षा के दृष्टिकोण से अर्ध-वार्षिक और त्रैमासिक गणना महत्वपूर्ण है। अर्ध-वार्षिक गणना में ब्याज दर को आधा और समय को दोगुना किया जाता है, जबकि त्रैमासिक गणना में दर को चार से विभाजित कर समय को चार गुना किया जाता है। इसके अतिरिक्त, दो वर्षों के लिए चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के अंतर को P × (R/100)^2 सूत्र से आसानी से निकाला जा सकता है। आज के सत्र में नौ अलग-अलग उदाहरणों के माध्यम से इन सूत्रों का व्यावहारिक अनुप्रयोग समझाया गया है, जिसमें मूल्यह्रास (Depreciation) और जनसंख्या वृद्धि जैसे विषय भी शामिल हैं।
छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे गणना करते समय ब्याज की अवधि और दर के बीच सामंजस्य बनाए रखें। वार्षिक दर को सीधे अर्ध-वार्षिक या त्रैमासिक अवधियों में लागू करना एक सामान्य त्रुटि है, जिससे बचना चाहिए। आज के पाठ में शामिल सभी उदाहरण शिक्षण उद्देश्यों के लिए तैयार किए गए हैं। आगामी सत्रों में TNPSC के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों के अभ्यास प्रश्नों को चरणबद्ध तरीके से हल कराया जाएगा।

