TNPSC ग्रुप 4 परीक्षा की तैयारी के लिए आज के सत्र में 'चक्रवृद्धि ब्याज' (Compound Interest) विषय को शामिल किया गया है। यह विषय पिछले दिनों पढ़ाए गए साधारण ब्याज और कार्य-समय से भिन्न है। चक्रवृद्धि ब्याज का अर्थ उस ब्याज से है जो मूलधन के साथ-साथ पिछले अवधियों में अर्जित ब्याज पर भी लगाया जाता है। इसे सरल शब्दों में 'ब्याज पर ब्याज' कहा जा सकता है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सूत्रों में वार्षिक, छमाही और तिमाही आधार पर ब्याज की गणना शामिल है। उदाहरण के लिए, वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज के लिए सूत्र A = P × (1 + R/100)^T है। यदि ब्याज छमाही देय हो, तो दर को आधा और समय को दोगुना किया जाता है। इसी प्रकार, मूल्यह्रास (Depreciation) की गणना के लिए (1 - R/100) का उपयोग किया जाता है। सत्र में आठ विशेष उदाहरणों के माध्यम से इन सूत्रों के व्यावहारिक अनुप्रयोग को समझाया गया है, जिसमें CI-SI का अंतर और अलग-अलग वर्षों के लिए भिन्न ब्याज दरें भी शामिल हैं।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज के सूत्रों में भ्रमित न हों। अभ्यास के लिए तमिलनाडु समचोर कलवी कक्षा 8 की गणित पुस्तक के अध्याय 4 को आधार बनाया गया है। आज के पाठ के लिए 25 अक्टूबर, 27 अक्टूबर, 31 अक्टूबर और 7 नवंबर को पुनरावृत्ति (Revision) की योजना निर्धारित की गई है। आज शाम 7 बजे होने वाले अभ्यास सत्र में इस विषय से संबंधित दो मुख्य प्रश्न पूछे जाएंगे।



